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ज्ञान - विज्ञान

गूगल ने घोषणा की है उसकी खुद चलने वाली कार का माडल सड़क पर परीक्षण के लिए तैयार है। -->

इंटरनेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी की खुद चलने वाली (सेल्फ ड्राइविंग) कार के दल ने गूगल प्लस सोशल नेटवर्क पर डाले संदेश में कहा ‘हम अपनी छुट्टियां परीक्षण में गुजारेंगे और हमें उम्मीद है कि नए साल में आपसे उत्तरी कैलिफोर्निया की सड़कों पर मुलाकात होगी।’ यह माडल उस अवधारणा पर विकसित हुआ है जिसका खुलासा कैलिफोर्निया की इस कंपनी, गूगल ने मई में किया था। कंपनी ने कहा था कि वह बिना स्टीयरिंग व्हील के खुद चलने वाली कार बनाएगी।

गूगल के क्रिस उर्मसन ने मई में एक ब्लाग में कहा था ‘इन कारों में स्टीयरिंग व्हील, ऐक्सेलरेटर, पेडल या ब्रेक पेडल नहीं होगा क्योंकि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है। हमारा साफ्टवेयर और सेंसर सारे काम करेगा।’ कल इस कार की तकनीकी विशेषताओं का खुलासा नहीं किया गया।

गूगल ने इस साल कहा था कि इस बैटरी से चलने वाली कार की अधिकतम गति सीमा 25 मील (40 किलोमीटर) प्रति घंटा होगी और इन्हें आम उपयोग के लिए बनाया जाए न कि लग्जरी कार के तौर पर। कल के ब्लाग में एक सफेद रंग के गोलाकार कीड़े की शक्ल का वाहन दिखाया गया।

 

बुलेट ट्रेन से भी तेज दौड़ेगा अमेरिका में बन रहा सुपरट्यूब -->

अभी तक बुलेट ट्रेन को पटरी पर सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन का दर्जा हासिल है, लेकिन जल्द ही इसकी जगह सुपरट्यूब का नाम होगा. अमेरिका में एक नई टेक्नोलॉजी ‘हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलोजीज’ की इस नई परिवहन प्रणाली पर शोध किया जा रहा है. सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही यह सुपरट्यूब लॉस एंजेलस से सैन फ्रांसिस्को की यात्रा 760 मील प्रति घंटा की रफ्तार से तय करते हुए 35 मिनट में पूरी कर लेगा.
गौरतलब है कि अभी इस दूरी को तय करने में ट्रेन से 12 घंटे और कार से छह घंटे से थोड़ा अधिक समय लगता है. ‘डेली मेल’ की खबर के मुताबिक, ‘स्पेस एक्स’ के संस्थापक और ‘टेस्ला मोटर्स’ के मुख्य कार्यकारी एलोन मस्क के इस ड्रीम प्रोजेक्ट हाइपरलूप को तैयार होने में कम से कम 10 साल लग सकते हैं. मस्क की इस परियोजना सुपरट्यूब पर दुनिया भर के 100 से अधिक इंजीनियर काम कर रहे हैं. इस ट्यूब के अंदर हाइपरलूप को उच्च दाब और ताप सहने की क्षमता वाले मिश्रधातु इंकोनेल से बने बेहद पतले स्की पर स्थिर किया जाता है. इस स्की में बेहद सूक्ष्म छिद्रों के जरिए दबाव डालकर हवा भरी जाती है, जिससे कि यह एक एअर कुशन की तरह काम करने लगता है.

स्की में लगे चुंबक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटके से हाइपरलूप के पॉड को गति दी जाती है. इस कैप्सूल में एक बार में छह से आठ व्यक्ति यात्रा कर सकते हैं और इसे हर 30 सेकेंड के अंतराल पर चलाया जा सकता है. हाइपरलूप के मुख्य कार्यकारी डर्क आहलबोर्न ने कहा, ‘कैप्सूल के आगे स्थित वायु ही इस कैप्सूल की एकमात्र अवरोधक है, जिसे हम दबाव के जरिए पीछे हटाते रहेंगे.’ मस्क बताते हैं कि 1,000 या उससे कम दूरी वाले शहरों के बीच तीव्र गति से परिवहन के लिए हाइपरलूप पूरी तरह व्यावहारिक समाधान हो सकता है.