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सामाजिक सरोकार से बाल अपराधों पर नियंत्रण-आयोगाध्यक्ष श्री शर्मा

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डाॅ राघवेन्द्र शर्मा ने विदिशा की जिला पंचायत के सभागार कक्ष में आज हुई कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि बाल अपराधो के नियंत्रण में सामाजिक सरोकार की भावना अतिआवश्यक है। कानून के प्रावधानो के तहत दण्डित किया जा सकता है किन्तु जब तक मानव बच्चों के प्रति संवेदनशील नही होगा तब तक बाल अपराध स्थायी रूप से नही रूक सकते है। 
आयोग अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि बच्चों के प्रति समाज संवेदनशील हो इसकी शुरूआत घर-परिवार से होनी चाहिए। उन्होंने कहानियों एवं घटित घटनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों से माॅ-बाप मित्रवर व्यवहार कर उनकी तकलीफो को जाने और बच्चो की जिज्ञासाओं का समाधान करें। इस दौरान उन्होंने बालको की देखरेख और संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को भी रेखांकित किया। 
जिला पंचायत अध्यक्ष श्री तोरण सिंह दांगी ने कहा कि जिम्मेदारी और जबावदेंही का निर्वहन हम सबकोें करना होगा। ताकि बच्चे सुरक्षित रहे और उनके मानसिक विकास में किसी भी प्रकार का अवरोध उत्पन्न ना हो। उन्होंने कहा कि हर बच्चा शिक्षित हो इसके लिए शासन ने प्रावधान किया है किन्तु अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों मेें अनेक बच्चे स्कूल जाने से रह जाते है। इसके लिए उन्होंने गांव-गांव वार पालकों की बैठक पाक्षिक अवधि में आयोजित कर उन्हें शिक्षा की महत्वता बताई जाए ताकि वे अपने बच्चों को हर रोज स्कूल भेजे। समाज की जागरूकता से बच्चों पर होने वाले अपराधो पर काफी नियंत्रण पाया जा सकता है। 
कलेक्टर श्री अनिल सुचारी ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य है। वे सशक्त होंगे तो युवा पीढ़ी और देश सशक्त होगा। बच्चों को उनका बचपन मिलना चाहिए। उनके अंदर अच्छे विचार, शिक्षा और संस्कार आएं इस कार्य में घर, परिवार और समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों के द्वारा बताई जा रही समस्याओं को गंभीरता से अभिभावकगण लें ताकि समस्याओं के कारण वे मानसिक रूप से अस्वस्थ ना हो। 
कलेक्टर श्री सुचारी ने कहा कि कार्यशाला में बच्चों की देखभाल और उनके लिए कानून के माध्यम से दिए जाने वाले संरक्षण से प्रशिक्षणार्थी भलीभांति अवगत हो। ततसंबंध में किसी भी प्रकार की जिज्ञासा हो तो उसका समाधान अनिवार्य रूप से प्राप्त करेें। 
पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र चैधरी ने कहा कि बच्चे जानकारी के अभाव मे भटक जाते है। उन्हें जागृत करने के लिए हम उनके साथ अपना समय व्यतीत करेें और उनकी समस्याओं का समाधान करें। अपराधो को नियंत्रित करने के लिए समाज में जागृति लाना अतिआवश्यक है। जिस प्रकार हम अपने बच्चों से स्नेह रखते है ठीक वैसे ही अन्य बच्चों से रखें। 
आयोग के पूर्व सदस्य श्री विभांशु जोशी ने किशोर न्याय अधिनियम की पृष्ठ भूमि, भारत का संविधान, एनसीआरसी राष्ट्रीय एवं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, बच्चों का सर्वोत्तम हित, समेकित बाल संरक्षण योजना, चाईल्ड लाइन इत्यादि के संबंध में कार्यशाला में शामिल प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया। कार्यशाला का संचालन परियोजना अधिकारी श्री संजय सिंह ने किया और आभार बाल कल्याण समिति की जिलाध्यक्ष श्रीमती मंजरी जैन ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में एकीकृत बाल विकास सेवाएं की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनीता कास्बा समेत विभागीय अन्य अधिकारी, कर्मचारी, स्वंयसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे।