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जीवन मंत्र

कब और कैसे करें Meditation, जानें छोटे-छोटे टिप्स...-->

कहते हैं ध्यान वो चीज है जो किसी आदमी के व्यवहार उसके स्वभाव और जीवन को बदलने की ताकत रखता है। इसके माध्यम से कई रोगों से भी मुक्ति पाई जा सकती है। इसलिए जो लोग जीवन में बदलाव व नई ऊर्जा चाहते है उन्हें रोज कम से कम 15 मिनट ध्यान करना चाहिए।

अक्सर कई लोग इस बात से बेचैन रहते हैं कि जब भी वे पूजा-पाठ, नाम-स्मरण या जप करने बैठते हैं तो उनका मन भटकता है। असल में, ध्यान या साधना को गहराई से जानने के लिए उन्हें खुद से ही पहले यह सवाल पूछना चाहिए कि जहां उनका ध्यान जाता है, उसका अभ्यास तो उन्होंने पहले नहीं किया, फिर भी आसानी से उनका मन बार-बार उस ओर क्यों चला जाता है।


जवाब में हल छुपा है कि जप, ध्यान या साधना के दौरान भी मन को बाहर के बजाए भीतर की ओर टिकाना जरूरी है। ध्यान के दौरान जब मंत्र के तालमेल से साधना में लीन होते ही साधक को साध्य यानी इष्ट की शक्ति महसूस होगी, जो यह भरोसा देती है कि जिस अनदेखे को वह पाने की कोशिश कर रहा है, वह हकीकत है, कल्पना नहीं। यानी सत्य से साक्षात्कार मन व आत्मा की बेचैनी खत्म होती है। ध्यानी व साधक सहजता व शांति महसूस करता है।


- साफ और समतल जमीन पर आसन बिछाकर बैठें, हिले-डुले नहीं।

- सांस को इस तरह काबू करें कि श्वास लेते वक्त पेट फूले और सांस छोड़ते समय पेट पीठ से चिपक जाए।
- इस तरीके से सांस पहले धीरे-धीरे लें, फिर उसमें थोड़ी तेजी लाएं। थकान या कमजोरी लगे तो विश्राम का भी ध्यान रखें।

- सांसों को बाहर निकाल किसी रूप या बिंदु पर ध्यान टिकाएं।

- अब सांस लेते वक्त सांसों को आता-जाता देखने पर ध्यान दें।

- गुरु मंत्र का जप करें। पहले होंठ से, फिर जीभ, कण्ठ, हृदय और नाभि से। मंत्र को सांसों के साथ जोड़ें।

- मंत्र की ध्वनि जितनी लय में होगी, सिद्धि उतनी जल्द मिलेगी।
 
- मन इधर-उधर जाएं तो उसे जाने दें। वह जहां जाए उसे देखतेभर रहें।

- मन के साक्षी ईश्वर के साथ जो खुद को करने वाला कहता है यानी मैं को महसूस करें।

- जब सोच या भाव की स्थिति में हों, तो भी यह जानने की कोशिश करें कि कौन इन सबसे प्रभावित हो रहा है।

- इनके अलावा ध्यान के साथ किए जाने वाले पूजा और कर्मकांडों को करते समय उसके बाहरी तौर-तरीकों में ही न उलझें रहे, उनकी आत्मा को, जिसे तत्व कहा जाता है, जानने की कोशिश करें।

इस तरह आप जितना खुद को संतुलित और ध्यानी या भीतर की ओर गौर करने वाला बनाने की कोशिश करेंगे, उतने ही शांत और सहज होते जाएंगे। आध्यात्मिक नजरिए से रग-रग में मौजूद भगवान आपकी भावना की सच्चाई को जानने व समझने के बाद आपको खुद राह बताएंगे यानी सिद्ध बना देंगे।
 
टाइम टेबल बनाकर काम करेंगे तो बढ़ सकती है कार्य क्षमता -->
 
टाइम टेबल बनाने से किसी भी व्यक्ति की क्षमता को बढ़ाया और उसकी गतिविधियों को और उद्देश्यपूर्ण बनाया जा सकता है।
वह एक मेगा इंटरकॉलेजिएट सांस्कृतिक कार्यक्रम था। हममें से तीन डांस में कॉलेज का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। वहीं छह लोगों का एक ग्रुप स्किट की प्रस्तुति देने वाला था। वह छुट्टी का दिन था। उसके बाद तीन दिन और छुट्टियां थी। हम दोपहर 3 बजे कॉलेज में मिले। वहीं से नए बने ब्लॉक के चेंजिंग रूम में चले गए। बस नौ प्रतिभागियों, दो टीचर्स और एक प्रिंसिपल के साथ शाम 5 बजे निकलने वाली थी। तैयार होने में हमने भरपूर समय लिया। जब हम पूरी तरह तैयार ही थे, तब अचानक दरवाजा बजा। दरवाजा बजाने वाला संयम खो बैठा था। जोर-जोर से दरवाजा बजा रहा था। जब तक मैंने दरवाजा नहीं खोला, तब तक वह वैसे ही बजता रहा। मैंने दरवाजा खोला तो सामने प्रिंसिपल थीं। चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था।
उनका हाथ फिर दरवाजे पर पडऩे ही वाला था। ऐसा लगा कि इस बार का टारगेट हम हैं। उन्होंने पूछा, 'तुम्हें पता भी है कि समय क्या हो गया है?’ उन्होंने संभलते हुए पूछा। हम सजग हो गए थे। एक-दूसरे का मुंह देखा और पता चला कि हममें से किसी के भी पास घड़ी नहीं है। 'तुमने किसी को बताया क्यों नहीं कि तुम लोग यहां आ रहे हो?’ सब चुप हो गए.. कोई जवाब नहीं था.. प्रिंसिपल बोलीं, 'पांच बजकर 40 मिनट हो गए हैं। पिछले 40 मिनट से हम तुम तीनों को पागलों की तरह पूरे कैम्पस में ढूंढ रहे हैं। यदि मेरे दिमाग में तुम्हें यहां आकर देखने का ख्याल न आया होता तो तुम लोग तीन दिन तक यहीं बंद रहते। गैरजिम्मेदार मूर्ख! जाओ जल्दी बस में बैठो।’ उन्होंने इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन हम शर्मिंदा थे। किस्मत अच्छी थी कि हमारा स्लॉट 7 बजे निर्धारित था। हम न केवल समय पर पहुंचे, बल्कि कॉलेज के लिए पहला पुरस्कार जीतने में भी कामयाब रहे।
 
17 साल पहले हुए इस वाकये ने मुझ पर गहरा प्रभाव डाला। उस दिन मैंने जाना कि हर पहलू में समय एक बड़ा फेक्टर होता है। एक अच्छा छात्र होना काफी नहीं है, आपको दिए हुए समय में परीक्षाओं के लिए भी अच्छी तैयारी करनी होती है। व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए तो हमेशा डांस प्रोग्राम्स और परीक्षाओं का युद्ध चलता था। मैं अच्छा प्रदर्शन न रहने पर एक-दूसरे का बहाना बनाती थी। एक ऐसे ही मौके पर मेरी मां ने मुझे बताया कि मुझे कोई विकल्प नहीं दिया गया है। मुझे दोनों में ही अच्छा प्रदर्शन करना है। उसके बाद से शिकायतें करना बंद हो गया। मुझे दोनों में अच्छा करना ही था। आज, पीछे मुड़कर देखती हूं तो मां का आभार मानती हूं कि उन्होंने मुझ पर वह अतिरिक्त दबाव डाला। मुझे तो यह लगता है कि वह थोड़ा दबाव और होता तो शायद मैं एक अच्छी गायिका भी बन गई होती।
 
एक अच्छा सचिव वह है जो अपना काम बिना गलती के करें, साथ में अपना कार्यक्रम सही समय पर आयोजित और खत्म करें। सेल्स एक्जीक्यूटिव को सुपर इफिशिएंट तभी माना जाएगा, जब वह सेल्स टारगेट पूरे करेगा और वह भी समय पर। मैगजीन को तो उस दिन न्यूजस्टैंड्स में आना ही है, फलां कार्यक्रम को अपने निर्धारित समय पर प्रसारित होना ही है। एडवर्टाइजिंग कैम्पेन को मौसम से पहले लॉन्च करना ही है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करना ही है। प्रोडक्ट को शेल्फ में आना ही है।
 
हम सभी को टाइम लिमिट का ध्यान रखना होता है। यह दिन, महीने या साल की हो सकती है। हमें अपनी रणनीति, नजरिया, तकनीक और प्राथमिकताओं को रीशैड्यूल करने की जरूरत पड़ती है। ताकि हम ऐसी परिस्थितियों का सामना कर सके, जिन्हें हम टाल नहीं सकते। इसके बाद भी हम अपना श्रेष्ठ काम करने की कोशिश करते हैं और समय पर काम पूरा करते हैं। सुधार के लिए हमेशा गुंजाइश होती है। आपको हमेशा लगेगा कि आपके पुराने असाइनमेंट में और बेहतर किया जा सकता था। कोई भी परफेक्ट नहीं होता। परफेक्ट होने की कला को सीखने का सिलसिला अंतहीन है। मायने रखता है आपके परफेक्शन की डिग्री और निर्धारित समय में आप क्या क्वालिटी दे पाए। क्षमता को इसी पहलू से आका जाता है कि आप निर्धारित समय में क्या रिजल्ट दे पाए? अक्सर, बिना टाइम फ्रेम वाले ड्रीम प्रोजेक्ट्स कभी शुरू ही नहीं हो पाते हैं। हालांकि, हमेशा आपके दिमाग में कहीं न कहीं प्राथमिकताओं की सूची भी चलती रहती है; और कभी-कभार तो फैसले लेकर हम कुछ गतिविधियों को धीमा कर कुछ अन्य गतिविधियों में गति बढ़ाते हैं। जब तक हम टाइम फ्रेम तय कर काम करते हैं और काम में धीमापन नहीं आने देते तो हम निश्चित तौर पर प्रगति करेंगे। व्यक्तिगत मोर्चे पर हो सकता है कि आप अपने बीमार रिश्तेदार से मिलने के लिए बाद में समय निकालना चाहते हो, लेकिन व्यस्त शैड्यूल में से 10 मिनट निकालकर मिल आना ज्यादा बेहतर होता है बाद में ज्यादा समय बिताने की योजना बनाने से।
 
यदि आप अपने आसपास देखें, आपको पता चलेगा कि जो लोग काम में गति दिखा रहे हैं वे ही सबसे ज्यादा ऑर्गेनाइज्ड और क्षमतावान हैं। जब आपके कामकाज से टाइम टैग होता है, तब आप क्षमतावान हो जाते हैं। यह क्षमता धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। परफेक्ट होने की योजना बनाकर कुछ न करने से शुरुआत कर कुछ कम परफेक्ट हो जाना बेहतर होता है। आप सब तरह के सपने देखो लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि सफलता की सीढ़ी की हर पायदान पर पैर रखना होता है और आप कभी भी आसमान से नहीं गिरेंगे। नतीजा यदि परफेक्ट से बहुत दूर रह गया तो भी आपने कम से कम परफेक्शन की ओर एक कदम बढ़ाया तो। यह अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है।
 
महात्रया रा-

महात्रया रा आध्‍यात्‍मिक गुरु हैं। वे देश-विदेश में अपने आध्‍यात्‍मिक व्‍याख्‍यानों के माध्‍यम से लोगों को सेल्‍फ रियलाइजेशन के लिए मार्गदर्शित करते हैं। उनके प्रभावी संदेश व्‍यक्‍ति की नकारात्‍मक ऊर्जा को सकारात्‍मक ऊर्जा में परिवर्तित करके जीवन की दिशा बदल देते हैं। उनके व्‍याख्‍यान सुनकर कई प्रसिद्ध हस्‍तियां, बिजनेसमैन, स्‍पोटर्सपर्सन और स्‍टूडेंट़स अपनी आंतरिक ऊर्जा की मदद से नई ऊंचाइयां प्राप्‍त कर चुके हैं। महात्रया रा जीवन जीने का एक नया रास्‍ता बताते हैं – ‘इंफीनीथीज्‍म’, जिसके माध्‍यम से मनुष्‍य को अपनी असीम क्षमता का अहसास हो सकता है।
 
इंफीनीमैगजीन-

इंफीनीमैगजीन प्रेरक कहानियों, उद्धरणों, विकासोन्मुख पोस्टरों और महान व्यक्तियों के विचारों से बनी है। दुनिया पर अमिट छाप छोड़ने वाले अलग-अलग पृष्ठभूमि के महान लोगों और बिना कुछ बोले विपरीत हालात में महान ऊंचाइयां छूने वाले लोगों पर नियमित कॉलम्स हैं। यह मैगजीन पाठकों को विपरीत हालात से जूझने के लिए प्रेरित करती है। इंफीनीमैगजीन के माध्‍यम से महात्रया रा लोगों को अपनी पूरी क्षमता और वो ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जहां तक वे अधिकारपूर्वक पहुंच सकते हैं।